Thursday, 19 November 2015

Bikini Babes | Hot Beautiful girls in Bikini | Amazing Bikini Girls

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Read also :अंजली ने सचिन को पहली बार 1990 में मुंबई एयरपोर्ट पर देखा था। तब सचिन करियर के पहले इंग्लैंड टूर से स्वदेश लौटे थे। एयरपोर्ट पर अंजली भी अपनी मां को रिसीव करने पहुंची थीं। अंजली अपनी मां का इंतजार कर रही थीं, तभी उनकी नजर 





















Thursday, 29 October 2015

About Panchi Bora

Hi

I am Panchi Bora. I  originally hails from Assam. My father is a retired army officer who settled in Pune after his retirement. I wanted to become a lawyer and enrolled at the ILS Law College in Pune. During my first year in college, I appeared in commercials and television advertisements. I worked alongside my mother in a Tata Indicom commercial, and got a break in a Cadbury advertisement.For my complete information and all pics please click here --->>>  Panchi Bora



Saturday, 16 May 2015

Believe in God


 

Believe in God-An Interesting Story

वृद्व पुजारी की आंखें सहसा खुल गई।उन्हें लगा मन्दिर में कहीं कोइ है। रात्रि का अन्तिम पहर। ‘कोई है या भ्रम है’’ पुजारी निर्णय न कर पाया।मोमबती जलाई, रोशनी में पुजारी के चेहरे पर अनुभव की रेखाएं चमक उठी। मोमबती लिए वे मन्दिर के उस कक्ष की तरफ बढ़ चले,जहा भगवान की मूर्ति स्थापित थी। पुजारी ने धीरे से कक्ष का दरवाजा खोला, मोमबती के प्रकाश से कक्ष प्रकाशित हो उठा। पुजारी ने देखा, एक क्षीणकाय व्यक्ति दान पेटी खोलने का प्रयास कर रहा है,उसी की रह रह कर ध्वनि उठ रही है।


भगवान की मूर्ति के चेहरे पर स्निग्ध मुस्कान विराजित है। क्षीणकाय व्यक्ति रोशनी से भयभीत हो कर पीछे की तरफ मुड़ा तो दरवाजे पर वृद्व पुजारी शांत मुंद्रा में खड़े थे।


 वह व्यक्ति पुजारी के चरणों में गिर पड़ा,-‘‘मुझे क्षमा करे’’ पुजारी ने कहा,-‘‘क्षमा तो उस भगवान से मांगो, जो सर्वदाता है।’’

 ‘‘मेरे साथ आओ।’’-पुजारी ने कहा और वापस चल पड़े। 

 वह व्यक्ति थके से कदमों से पुजारी के पीछे उनके कक्ष में पहुंचा। वृद्व पुजारी ने उस व्यक्ति को रूपये देते हुए कहा,-‘‘ये रूपये लो।इस कक्ष में जो वस्तु तुम्हे चाहिए ले जा सकते हो।’’

 उस व्यक्ति ने विस्मय से कहा,-‘‘रूपये तो में वहीं से भी निकाल रहा था।’’

 पुजारी ने उतर दिया,-‘‘वह सम्पति जनता की थी,यह मेरी निजी सम्पति है।अगर वहॉं चोरी हो जाती तो जनता का भगवान से विश्वास खत्म हो जाता।ईश्वर लोगों का अन्तिम विश्वास है।’’
 क्षीणकाय व्यक्ति पश्चाताप की मुद्रा में बोला,-‘‘पुजारी जी,मुझे क्षमा करें।मैं अपनी स्वार्थ पूर्ति हेतु न जाने कितने लोगों का विश्वास तोड़ रहा था और एक आप है जो लोगों का विश्वास रखने के लिए अपना सब कुछ दे रहे हो। आप धन्य हैं,जिन्होने मुझे नया रास्ता दिखाया।’’
 वह व्यक्ति अपने अश्रु पोंछता हुआ बाहर निकल गया।पूर्व से सुर्य की लालिमा धीरे-धीरे फैलने लगी।

ThePerfectFun.blogspot.in-        


Wednesday, 13 May 2015

Interesting Hindi Story-Swami vivekananda


Swami Vivekananda story
एक बार स्वामी विवेकानन्द के आश्रम में एक व्यक्ति आया जो देखने में बहुत दुखी लग रहा था । वह व्यक्ति आते ही स्वामी जी के चरणों में गिर पड़ा और बोला कि महाराज मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ मैं अपने दैनिक जीवन में बहुत मेहनत करता हूँ , काफी लगन से भी काम करता हूँ लेकिन कभी भी सफल नहीं हो पाया । भगवान ने मुझे ऐसा नसीब क्यों दिया है कि मैं पढ़ा लिखा और मेहनती होते हुए भी कभी कामयाब नहीं हो पाया हूँ ।
स्वामी जी उस व्यक्ति की परेशानी को पल भर में ही समझ गए । उन दिनों स्वामी जी के पास एक छोटा सा पालतू कुत्ता था , उन्होंने उस व्यक्ति से कहा – तुम कुछ दूर जरा मेरे कुत्ते को सैर करा लाओ फिर मैं तुम्हारे सवाल का जवाब दूँगा ।
आदमी ने बड़े आश्चर्य से स्वामी जी की ओर देखा और फिर कुत्ते को लेकर कुछ दूर निकल पड़ा । काफी देर तक अच्छी खासी सैर करा कर जब वो व्यक्ति वापस स्वामी जी के पास पहुँचा तो स्वामी जी ने देखा कि उस व्यक्ति का चेहरा अभी भी चमक रहा था जबकि कुत्ता हाँफ रहा था और बहुत थका हुआ लग रहा था । स्वामी जी ने व्यक्ति से कहा – कि ये कुत्ता इतना ज्यादा कैसे थक गया जबकि तुम तो अभी भी साफ सुथरे और बिना थके दिख रहे हो तो व्यक्ति ने कहा कि मैं तो सीधा साधा अपने रास्ते पे चल रहा था लेकिन ये कुत्ता गली के सारे कुत्तों के पीछे भाग रहा था और लड़कर फिर वापस मेरे पास आ जाता था । हम दोनों ने एक समान रास्ता तय किया है लेकिन फिर भी इस कुत्ते ने मेरे से कहीं ज्यादा दौड़ लगाई है इसीलिए ये थक गया है ।
स्वामी जी ने मुस्कुरा कर कहा -यही तुम्हारे सभी प्रश्नों का जवाब है , तुम्हारी मंजिल तुम्हारे आस पास ही है वो ज्यादा दूर नहीं है लेकिन तुम मंजिल पे जाने की बजाय दूसरे लोगों के पीछे भागते रहते हो और अपनी मंजिल से दूर होते चले जाते हो ।
मित्रों यही बात हमारे दैनिक जीवन पर भी लागू होती है हम लोग हमेशा दूसरों का पीछा करते रहते है कि वो डॉक्टर है तो मुझे भी डॉक्टर बनना है ,वो इंजीनियर है तो मुझे भी इंजीनियर बनना है ,वो ज्यादा पैसे कमा रहा है तो मुझे भी कमाना है । बस इसी सोच की वजह से हम अपने टेलेंट को कहीं खो बैठते हैं और जीवन एक संघर्ष मात्र बनकर रह जाता है , तो मित्रों दूसरों की होड़ मत करो और अपनी मंजिल खुद बनाओ

Monday, 11 May 2015

Good Morning saved him


Interesting Hindi Story

ये कहानी इक ऐसे व्यक्ति की है जो एक फ्रीजर प्लांट में काम करता था ।
वह दिन का अंतिम समय था व् सभी घर जाने को तैयार थे तभी प्लांट में एक तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गयी और वह उसे दूर करने में जुट गया ।
जब तक वह कार्य पूरा करता तब तक अत्यधिक देर हो गयी । दरवाजे सील हो चुके थे व् लाईटें बुझा दी गईं । बिना हवा व् प्रकाश के पूरी रात आइस प्लांट में फसें रहने के कारण उसकी बर्फीली कब्रगाह बनना तय था ।
घण्टे बीत गए तभी उसने किसी को दरवाजा खोलते पाया ।...क्या यह इक चमत्कार था ?
सिक्यूरिटी गार्ड टोर्च लिए खड़ा था व् उसने उसे बाहर निकलने में मदद की। वापस आते समय उस व्यक्ति ने सेक्युर्टी गार्ड से पूछा "आपको कैसे पता चला कि मै भीतर हूँ ?" गार्ड ने उत्तर दिया " सर, इस प्लांट में 50 लोग कार्य करते हैँ पर सिर्फ एक आप हैँ जो सुबह मुझे हैलो व् शाम को जाते समय बाय कहते हैँ ।
आज सुबह आप ड्यूटी पर आये थे पर शाम को आप बाहर नही गए । इससे मुझे शंका हुई और मैं देखने चला आया ।
वह व्यक्ति नही जानता था कि उसका किसी को छोटा सा सम्मान देना कभी उसका जीवन बचाएगा ।
याद रखेँ, जब भी आप किसी से मिलते हैं तो उसका गर्मजोश मुस्कुराहट के साथ सम्मान करें । हमें नहीं पता पर हो सकता है कि ये आपके जीवन में भी चमत्कार दिखा दे ।


Saturday, 9 May 2015

Hindi Story Green colour

Interesting Hindi Story

 एक शहर में एक धनी व्यक्ति रहता था, उसके पास बहुत पैसा था और उसे इस बात पर बहुत घमंड भी था| एक बार किसी कारण से उसकी आँखों में इंफेक्शन हो गया|
आँखों में बुरी तरह जलन होती थी, वह डॉक्टर के पास गया लेकिन डॉक्टर उसकी इस बीमारी का इलाज नहीं कर पाया| सेठ के पास बहुत पैसा था उसने देश विदेश से बहुत सारे नीम- हकीम और डॉक्टर बुलाए| एक बड़े डॉक्टर ने बताया की आपकी आँखों में एलर्जी है| आपको कुछ दिन तक सिर्फ़ हरा रंग ही देखना होगा और कोई और रंग देखेंगे तो आपकी आँखों को परेशानी होगी|
अब क्या था, सेठ ने बड़े बड़े पेंटरों को बुलाया और पूरे महल को हरे रंग से रंगने के लिए कहा| वह बोला- मुझे हरे रंग से अलावा कोई और रंग दिखाई नहीं देना चाहिए मैं जहाँ से भी गुजरूँ, हर जगह हरा रंग कर दो|
इस काम में बहुत पैसा खर्च हो रहा था लेकिन फिर भी सेठ की नज़र किसी अलग रंग पर पड़ ही जाती थी क्यूंकी पूरे नगर को हरे रंग से रंगना को संभव ही नहीं था, सेठ दिन प्रतिदिन पेंट कराने के लिए पैसा खर्च करता जा रहा था|
वहीं शहर के एक सज्जन पुरुष गुजर रहा था उसने चारों तरफ हरा रंग देखकर लोगों से कारण पूछा| सारी बात सुनकर वह सेठ के पास गया और बोला सेठ जी आपको इतना पैसा खर्च करने की ज़रूरत नहीं है मेरे पास आपकी परेशानी का एक छोटा सा हल है.. आप हरा चश्मा क्यूँ नहीं खरीद लेते फिर सब कुछ हरा हो जाएगा|
सेठ की आँख खुली की खुली रह गयी उसके दिमाग़ में यह शानदार विचार आया ही नहीं वह बेकार में इतना पैसा खर्च किए जा रहा था|
तो मित्रों, जीवन में हमारी सोच और देखने के नज़रिए पर भी बहुत सारी चीज़ें निर्भर करतीं हैं कई बार परेशानी का हल बहुत आसान होता है लेकिन हम परेशानी में फँसे रहते हैं| तो मित्रों इसे कहते हैं सोच का फ़र्क|